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हार्ट हॉस्पिटल के डीडीसी पर बाहर खुले में पड़ी दवाएं धूल फांक रही हैं। इनमें से कुछ की एक्सपायरी डेट भी नजदीक है।
संभाग के सबसे बड़े पीबीएम हॉस्पिटल में जीवन रक्षक दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए जगह कम पड़ रही है। वार्डों को सब स्टोर बना रखा है, जबकि मरीजों को जर्जर वार्डों में रखा जा रहा है। डीडीसी पर दवाएं खुले में पड़ी धूल फांक रही हैं।राज्य सरकार की निशुल्क दवा
इसके अलावा तीन सब स्टोर हैं, जहां दवाओं का स्टॉक रहता है। दैनिक भास्कर ने रियलिटी चेक किया तो तीनों सब स्टोर अलग-अलग विभागों के वार्डों में चलते नजर आए। सब स्टोर नंबर एक ने जीरियाट्रिक्स अस्पताल के दो वार्डों पर कब्जा जमाया हुआ है। दो नंबर सब स्टोर डायबिटिक रिसर्च सेंटर के वार्ड में चल रहा है और तीसरा सब स्टोर जनाना विंग के कॉटेज में है। इन तीनों जगहों पर दवाएं बिखरी रहती हैं। सफाई तक नहीं होती। कार्टून और पैकेट्स पर धूल पड़ी रहती है। पंखे ही खराब पड़े हैं एसी ही नहीं है।
एक कूलर से काम चलाना पड़ रहा है। हॉस्पिटल में ऐसी कोई बिल्डिंग नहीं है, जहां सभी दवाएं निर्धारित नियमानुसार सुरक्षित रखी जा सकें। हालांकि पीबीएम अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा ने जीरियाट्रिक्स अस्पताल के पीछे खाली पड़ी जगह पर सब स्टोर निर्माण के लिए जिला कलेक्टर को पत्र लिखा था। उन्होंने डीएमएफटी फंड से दो से चार करोड़ तक का बजट एक माह पहले मांगा था, जो अब तब नहीं मिला।
पीबीएम में दो ड्रग वेयर हाउस, एक सीएमएचओ कापीबीएम परिसर में दो ड्रग वेयर हाउस हैं, जिसमें से एक सीएमएचओ के अधीन है। वहां से जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं की सप्लाई जाती है। इस वेयर हाउस में काफी बड़ी जगह घेर रखी है। दरअसल इस वेयर हाउस के लिए जगह नहीं मिल रही थी। तत्कालीन कॉलेज प्रिंसिपल ने पीबीएम परिसर में ही जगह दे दी। डॉक्टरों का कहना है कि यदि इस वेयर हाउस में दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए तो यहां नया सब स्टोर बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मरीज जर्जर बिल्डिंग में भर्ती, वार्डों में दवाएं भरींपीबीएम हॉस्पिटल अनियमितता का बोलबाला है। अस्पताल के एच और जेड वार्ड की हालत जर्जर है। पीडब्ल्यूडी ने पिछले दिनों निरीक्षण के दौरान इन वार्डों में मरीज भर्ती नहीं करने की सलाह दी थी। चेतावनी का नोटिस भी लगाया था, लेकिन पीबीएम के कर्मचारियों ने नोटिस ही उतार फेंका। मरीजों को रुटीन में भर्ती करने का काम जारी है, जबकि तीन सब स्टोर ने चार वार्ड और कॉटेज रोक रखे हैं।
हार्ट और ईएनटी विंग के डीडीसी छोटे, धूल फांक रहीं दवाएं
पीबीएम हॉस्पिटल में कुल 36 ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर हैं, जहां से मरीजों को दवाएं दी जाती हैं। एक सेंटर को छोड़कर बाकी सभी इतने छोटे हैं कि स्टाफ के बैठने के लिए भी जगह कम पड़ती है। दवाएं जमीन पर या सेंटर के बाहर खुले में पड़ी रहती हैं। भीषण गर्मी में बचाव के लिए एसी तक नहीं है। नियमानुसार सभी सेंटरों पर फ्रिज होने चाहिए, जिससे दो से 8 डिग्री टैंपरेचर वाली दवाओं को रखा जा सके, लेकिन आईपीडी वाले सात ही डीडीसी के पास फ्रिज हैं। हल्दीराम हार्ट हॉस्पिटल के डीडीसी पर अधिकांश दवाएं बाहर खुले में रखी हुई हैं, जिन पर धूल चढ़ रही है। इनमें कुछ दवाओं की एक्सपायरी भी नजदीक हैं।
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