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केशव स्कूल में बच्चों ने रचा अद्भुत ‘कृष्ण लोक

बच्चों ने अपनी अद्भुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जीवंत झांकियों के माध्यम से भगवान कृष्ण के जीवन दर्शन को साकार कर दिया। इन नन्हे कलाकारों ने मंच पर अपनी कला का ऐसा जादू बिखेरा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

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यहीं नहीं यहां पर बच्चों ने एक-एक कर भगवान कृष्ण के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को झांकियों के रूप में प्रस्तुत किया। सबसे पहले, कृष्ण जन्म की झांकी ने सभी का मन मोह लिया। जेल की सलाखों के पीछे वासुदेव कान्हा को टोकरी में रखकर यमुना पार करा रहे थे और शेषनाग उनकी रक्षा कर रहे थे। इस दृश्य को देखकर ऐसा लगा मानो हम उसी समय में पहुंच गए हों।

मौका था श्री कृष्ण जमाष्टमी के अवसर पर केशव उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या विद्या मंदिर स्कूल में प्रस्तुत संस्कृतिक संध्या और जीवंत झांकियों के माध्यम से भगवान कृष्ण के जीवन दर्शन प्रस्तुत करने का।

बच्चों ने पूतना वध और कालिया नाग दमन की झांकियां प्रस्तुत कीं, जिन्होंने दर्शकों को वीरता और साहस का संदेश दिया। नन्हे कृष्ण के रूप में सजे बच्चों ने पूतना का वध और कालिया नाग को अपने वश में करते हुए दिखाया।

मंच पर जब माखन चोरी की झांकी आई, तो बच्चों की शरारतें देखकर दर्शक हंस पड़े। माखन से भरी मटकी फोड़कर और माखन खाते हुए नन्हे कान्हा ने सबका दिल जीत लिया। अंत में, गोवर्धन धारण की झांकी ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। बच्चों ने अपनी कला के माध्यम से दिखाया कि कैसे भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर गोकुल वासियों की रक्षा की।

इन सभी सजीव झांकियों ने श्रद्धालुओं को भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं की अनुभूति कराई। बच्चों की प्रस्तुतियों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि धर्म और संस्कृति के प्रति आस्था भी जगाई।

स्कूल प्रांगण में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों पर आधारित 15 झांकियां सजाई गईं। हर झांकी ने कृष्ण चरित्र के अलग-अलग अध्याय को जीवंत कर दिया। सैकड़ों श्रद्धालु देर रात तक झांकियों के दर्शन करने पहुंचे।

पहली झांकी: कंस का कारागृह

इस झांकी में कंस द्वारा देवकी और वासुदेव को बंदीगृह में कैद किया जाना दर्शाया गया। अंधेरे कारागार में जन्म लेने वाले श्रीकृष्ण की कहानी ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। लोगों ने इसे कृष्ण जन्म की शुरुआत मानकर जयकारे लगाए।

दूसरी झांकी: वासुदेव गोकुल गमन

वासुदेव जी को यमुना पार कर गोकुल जाते दिखाया गया। सिर पर टोकरी में शिशु कृष्ण और तेज बहती यमुना की लहरें बेहद आकर्षक लगीं। श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर मानो उसी युग में पहुंच गए।

तीसरी झांकी: पूतना वध

कंस द्वारा भेजी गई दानवी पूतना जब बालकृष्ण को विषपान कराने आई, तो कृष्ण ने उसका वध कर दिया। इस झांकी ने बच्चों और बड़ों को खूब आकर्षित किया। भक्तों ने इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश माना।

चौथी झांकी: माखन चोर

नंदलाल का प्रिय स्वरूप झांकी में जीवंत था। बालकृष्ण मटकी फोड़ते और माखन चुराते नजर आए। साथ में गोपियां उन्हें देख हंस रही थीं। दर्शकों ने इसे बड़े आनंद से देखा और खूब तस्वीरें खींचीं।

पांचवीं झांकी: ओखल बंधन

यशोदा मैया ने नटखट कृष्ण को शरारतों से रोकने के लिए ओखल से बांध दिया। इस झांकी में बालकृष्ण को ओखल से बंधे दिखाया गया। बच्चों ने इस दृश्य को देखकर तालियां बजाईं।

छठी झांकी: श्याम दरबार

ग्वालबाल और भक्तों से घिरे श्याम सुंदर का दरबार सजा। संगीत, वाद्य और भक्तिभाव से परिपूर्ण इस झांकी को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

सातवीं झांकी: राधा कृष्ण मंदिर

इस झांकी में राधा-कृष्ण की अद्भुत छवि दिखाई गई। राधारानी संग खड़े कान्हा ने रसिक भाव को प्रकट किया। मंदिर जैसे वातावरण में इस झांकी ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डूबा दिया।

आठवीं झांकी: मीरा के श्याम

भक्ति की पराकाष्ठा मीरा की झांकी में दिखी। मीरा बाई कृष्ण चरणों में लीन थीं। श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को देखकर भक्ति मार्ग और समर्पण की सीख ली।

नौवीं झांकी: कालिया मर्दन

यमुना में बसे कालिया नाग के फन पर नृत्य करते श्रीकृष्ण का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया गया। कृष्ण ने नाग का दमन कर जल को निर्मल बनाया। यह झांकी वीरता और धर्म की रक्षा का संदेश देती रही।

दसवीं झांकी: विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी

इस झांकी में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद स्वरूप दृश्य सजाया गया। श्रद्धालु यहां आकर अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करने लगे। यह झांकी शांत और दिव्य आभा से भरी रही।

ग्यारहवीं झांकी: सुदामा सेवा

सुदामा जब द्वारका पहुंचे तो कृष्ण ने उनके पैर धोकर स्वागत किया। इस झांकी ने मित्रता और समानता का गहरा संदेश दिया। श्रद्धालु भावुक हो उठे।

बारहवीं झांकी: गोवर्धन पर्वत

कृष्ण को गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाए दिखाया गया। साथ में ग्रामीण और गोपियां उनका आभार जता रही थीं। इस झांकी ने सामूहिक एकता और संरक्षण का भाव प्रकट किया।

तेरहवीं झांकी: शिव आराधना

कृष्ण द्वारा महादेव की आराधना का दृश्य सजाया गया। इसमें दोनों देव शक्तियों का मिलन दर्शाया गया। श्रद्धालु इस अद्भुत झांकी को देख मंत्रमुग्ध हो गए।

चौदहवीं और पंद्रहवीं झांकियां

शेष झांकियों में कृष्ण के बाल्यकाल के अन्य प्रसंग और भक्ति स्वरूप दृश्य दिखाए गए। हर झांकी में भक्तिरस और शिक्षाप्रद संदेश निहित रहा। बच्चों ने इसमें जीवंत अभिनय कर उत्सव को यादगार बना दिया।

श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

जन्माष्टमी महोत्सव में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देर रात तक स्कूल परिसर में भीड़ लगी रही। भक्तों ने झांकियों के दर्शन कर आनंद उठाया और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से वातावरण गूंजा।

बच्चों ने निभाया श्रीकृष्ण और राधा का रूप

विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने जन्माष्टमी के मौके पर राधा और कृष्ण का स्वरूप धारण किया। रंग-बिरंगे परिधानों और श्रृंगार से सजे बालक-बालिकाएं जब मंच पर उतरे तो वातावरण तालियों और जयकारों से गूंज उठा। छोटे-छोटे बच्चों द्वारा की गई प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं और दर्शकों का मन मोह लिया। नन्हे बच्चों ने जब दही-हांडी और माखन चोरी जैसी लीलाओं को जीवंत किया तो दर्शकों ने खूब उत्साह के साथ उनकी हौसला अफजाई की।

विद्यालय प्रबंधन की ओर से मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें भजन-कीर्तन और नृत्य प्रस्तुतियों ने सभी को भक्ति रस में डुबो दिया। मंच से जब “नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” जैसे भजन गूंजे, तो श्रोतागण भी तालियों और स्वर मिलाकर झूम उठे।



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