भिवाड़ीPublished: Feb 22, 2024 07:16:00 pm
सितंबर में 15 दिन दौड़ाए थे 17 अधिकारी, कलक्टर द्वारा कराए सर्वे से क्या हल निकला
जलभराव हुआ तो दोबारा याद आया फैक्ट्रियों का सर्वे
भिवाड़ी. छह महीने बाद बायपास पर दोबारा जलभराव हुआ है। प्रशासन हरकत में आया है। उच्च स्तर के अधिकारी बदल चुके हैं, स्थानीय स्तर पर कुछ पुराने कार्मिक तैनात है। पुरानी कहानी को ही नए सिरे से गढ़ा जा रहा है।। नए अधिकारी भी अभी मामला समझ रहे हैं। लेकिन जो कर्रवाई और सर्वे चार-पांच महीने पहले हुए हैं, उन्हें ही प्रशासन अभी कराने की बात कह रहा है, इससे एक बात स्पष्ट है कि उच्चाधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है।
मंगलवार को बीडा में हुई बैठक के बाद प्रशासन ने बताया कि सीईटीपी से कनेक्शन नहीं लेने वाली और खुले में पानी छोडऩे वाली इकाइयों का सर्वे कराया जा रहा है। लेकिन हाल ही में कलक्टर का पदभार संभालने वाली अर्तिका शुक्ला को स्थानीय अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि इस तरह का सर्वे पहले भी हो चुका है। इस सर्वे के बाद सैकड़ों इकाइयों को नोटिस भी थमाए गए थे। लेकिन कलक्टर ओपी बैरवा के तबादले के बाद उन नोटिस से क्या परिणाम निकलकर सामने आया यह आज तक उजागर नहीं हुआ है। पानी निकासी एवं निस्तारण के इंतजाम में विफल रहे स्थानीय अधिकारियों को नवंबर में आकर राहत मिली थी। तब सांसद बालकनाथ ने मतदान से पूर्व जल निकासी शुरू कराई। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारी अपनी दुनिया में मस्त हो गए। बायपास पर छह महीने बाद जलभराव बढ़ा है तो दोबारा से वही स्क्रिप्ट पढ़ाई जा रही है।
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इस तरह चला घटनाक्रम
बायपास पर 19 अगस्त को जलभराव हुआ। कलक्टर ओपी बैरवा ने छह सितंबर को सर्वे के लिए 17 टीम का गठन किया। सर्वे में 915 इकाई चिन्हित हुई। 500 इकाइयों ने कनेक्शन लिए। 36 में कनेक्शन की प्रक्रिया चल रही थी। 226 इकाइयों ने कनेक्शन लेने के लिए आवेदन और जरूरी निर्माण नहीं किया। 153 इकाई बंद पाई गईं। कलक्टर ने प्रदूषण मंडल क्षेत्रीय अधिकारी को सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने निर्देशित किया। प्रदूषण मंडल ने 226 इकाइयों को कंसेंट टू ऑपरेट निरस्तीकरण एवं जल व वायु अधिनियमों की धारा 31 अ/ 33 अ के प्रावधान के तहत नोटिस जारी किए। 25 सितंबर तक जबाव मांगे गए, जबाव क्या आए और क्या कर्रवाई हुई, इसके बारे में प्रदूषण मंडल ने कभी तथ्य सार्वजनिक नहीं किया। कलक्टर ओपी बैरवा का तबादला हो गया और सर्वे रिपोर्ट दबा दी गई।
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कुछ अधिकारी बड़े मास्टर
जलभराव की समस्या को दूर करने स्थानीय से लेकर उच्च स्तर तक की बैठक हो रही हैं। इन बैठकों में कुछ अधिकारी रिंग मास्टर के रोल में होते हैं। वह जलभराव का कभी कुछ तो कभी कुछ कारण बताते हैं। गेंद को हमेशा दूसरे के पाले में ही फेंक देते हैं। हर बैठक में एक नया विजन पेश कर देते हैं। समस्या की असल जड़ तक नहीं पहुंचने देते। खुद के विभाग की हल्की-ठोस कार्रवाई भी कभी नहीं बताते। नोटिस पर क्या हुआ इसके लिए मुख्यालय से निर्देश नहीं मिले इस तरह की आड़ लेते दिखाई देते हैं। साहब बड़े उस्ताद हैं। कोई भी अधिकारी बदले उससे कुछ दिनों में उनकी नजदीकी की चर्चा होने लगती है।

When there was waterlogging, the survey of factories was again rememb | जलभराव हुआ तो दोबारा याद आया फैक्ट्रियों का सर्वे – New Update
Credit : Rajasthan Patrika