भिवाड़ीPublished: Dec 18, 2023 07:56:44 pm
आठ लाख से अधिक लोगों के जीवन का सवाल, सरकार और विभाग लगाए विदेशों की तरह स्मॉग टॉवर
पांच हजार करोड़ से अधिक का राजस्व, हवा को स्वच्छ करने खर्च होंगे 400 करोड़
धर्मेंद्र दीक्षित
भिवाड़ी. औद्योगिक क्षेत्र की हवा सांस लेने लायक नहीं है। लेकिन इसे स्वच्छ करने के लिए जो प्रयास होने चाहिए वह भी जिम्मेदार विभाग और सरकार नहीं कर रही है। यहां हवा को स्वच्छ करने के लिए विदेशों की तरफ स्मॉग टॉवर लगाए जाने चाहिए। इन टॉवर को लगाने पर करीब 400 करोड़ रुपए की लागत आएगी, इसके बाद यहां की हवा स्वच्छ हो जाएगी। लेकिन इस जीवन रक्षक उपकरणों को लगाने में कोई विभाग रुचि नहीं दिखा रहा है। जबकि भिवाड़ी से हर साल सरकार को पांच हजार करोड़ से अधिक का राजस्व मिलता है। इसके अतिरिक्त आईजीएसटी और सीजीएसटी रहता है।
औद्योगिक क्षेत्र में 1.75 लाख मजदूर ईएसआईसी में पंजीकृत है। एक कार्ड पर चार परिजन भी मानें तो यह आंकड़ा सात लाख लोगों का होता है। इसके अतिरिक्त ठेके पर भी बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। अब इनके साथ ही वे कर्मचारी और अधिकारी हैं जो कि कंपनियों में बड़े पद पर हैं। इस तरह लाखों लोग यहां रोजगार और व्यापार करने के लिए रहते हैं, लेकिन उनको स्वच्छ हवा नहीं मिलती।
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छह महीने दूषित हवा
अक्टूबर से शुरू होने वाला ग्रेप मार्च तक चलता है। इस प्रकार हवा के जहरीले होने की वजह से ग्रेप की बंदिश लागू रहती हैं। ये बंदिश उद्योग धंधों पर तो नगण्य असर दिखाती हैं, पर आमजन को तो उसी दूषित, जहरीली एवं धूल भरी हवा में ही हवा लेनी पड़ती है। भिवाड़ी कभी देश में कभी विश्व में प्रदूषण को लेकर नंबर एक पर पहुंच जाता है। साल के छह महीने यहां एक्यूआई का औसत तीन सौ रहता है। इस दौरान साढ़े चार सौ अंक तक भी जाता है। शनिवार को भी एक्यूआई 335 रहा।
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ऐसे स्वच्छ होगी हवा
भिवाड़ी शहर का क्षेत्रफल 42 वर्ग किमी है। यहां औद्योगिक क्षेत्र और आबादी के घनत्व को देखते हुए 40 पंखा, 5000 एयर फिल्टर, 24 मीटर ऊंचाई का एक स्मॉग टॉवर एक किमी क्षेत्रफल में हवा को स्वच्छ कर देगा, इसकी लागत करीब 20 करोड़ रुपए आएगी। पूरे क्षेत्र में 20 स्मॉग टॉवर की जरूरत होगी, जिसकी अनुमानित लागत करीब 400 करोड़ होगी। दुनिया के अन्य शहर में इस तरह ही टॉवर लगे हैं। आबादी, औद्योगिक क्षेत्र, जनसंख्या घनत्व के अनुसार छोटे बड़े टॉवर लग सकते हैं।
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यह है राजस्व का गणित
औद्योगिक क्षेत्र से राज्य सरकार को 1333 करोड़ एसजीएसटी, 1140 करोड़ वैट, 2500 करोड़ विद्युत निगम, 120 करोड़ पंजीयन विभाग और 90 करोड़ परिवहन विभाग से राजस्व मिलता है। सीजीएसटी और आईजीएसटी भी अर्जित होता है।
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हवा में धूल के कण अधिक होने और लगातार दूषित हवा में सांस लेने से सिलिकोसिस, सांस लेने में दिक्कत, गले, आंख, नाक में संक्रमण, फेफड़ें में भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए भोजन, पानी से पहले स्वच्छ हवा जरूरी है। डॉ. केके शर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी
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अजंता चौक पर ट्रायल कराया गया था, लेकिन उससे कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ा, इसके बाद हमने कंपनी को भी इसे हटाने के लिए कह दिया।
अमित शर्मा, आरओ, प्रदूषण मंडल
Revenue of more than five thousand crores, Rs 400 crores will be spen | पांच हजार करोड़ से अधिक का राजस्व, हवा को स्वच्छ करने खर्च होंगे 400 करोड़ – New Update
Credit : Rajasthan Patrika