ये जैविक खेती की जगा रहे अलख पूरी तरह जैविक खेती- जिले के धतुरिया निवासी जैविक किसान देवीलाल गुर्जर ने बताया कि वो 9 साल से पूरी तरह से साढ़े सात बीघा में जैविक खेती कर रहे हैं। उन्होने जैविक प्रमाणन संस्था रोको में भी अपना पंजीयन करवा रखा है। गुर्जर खरीफ में मक्का, सोयाबीन, उड़द, मंूग व रबी में गेहंू, चना की खेती करते हैं। इस समय सोना मोती किस्म के गेहूं लगा रखे हैं। किसान ने बताया कि आजकल कैंसर, हार्ट अटैक सहित कई गंभीर बीमारियां पेस्टीसाइड व यूरिया के फसलों में अधिक प्रयोग करने से हो रही है। हमें हमारी सेहत सुधारना है तो जैविक खेती अपनानी होगी।
4 दिन तक रहता है रसायन का असर-
जिले के जेताखेडी निवासी जैविक किसान गोपाल दांगी 2015 से जैविक खेती कर रहे हैं। दंागी का कहना कि खेती में रसायन का प्रयोग करने पर फसल व सब्जियों में उसका असर चार दिन तक रहता है। उसी अनाज व सब्जियों को अगर हम खाते हैं तो उसका असर हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। कई गंभीर बीमारियों का कारण यही है। इसी वजह से मैं तीन बीघा में पूरी तरह से जैविक खेती करता हूं। जिसमें रबी में गेहूं, व सब्जी लेता हूं। खरीफ में मक्का, उड़द, चंवला, मंूग आदि जैविक करता हूं। जैविक फसलों से स्वास्थ्य ठीक रहता है। अब तो घर के लिए तो पूरी तरह से जैविक ही काम में लेते हैं।
अलग रहता है जैविक का स्वाद-
जिले के रायपुर निवासी राजेन्द्रङ्क्षसह झाला डावल गांव में 15 बीघा में पूरी तरह से जैविक खेती करते हैं। झाला बड़े स्तर पर वर्मी कंपोस्ट भी बनाते हैं, जो अपने खेत में काम लेने के बाद बचता है उसे अन्य किसानों को भी बेच देते हैं। झाला ने बताया कि जैविक फसल का स्वाद व क्वालिटी अलग ही नजर आ जाती है। उन्होने अभी धनिया, गेहंू, मसूर व सरसों की खेती जैविक की है। गोमूत्र व नीम पत्ती, धतूरा सहित अन्य प्राकृतिक औषधियों से स्वयं ही कीटनाशक बनाते हैं।
जैविक के नाम पर लूट रही कंपनियां-
जिले के मिश्रोली निवासी किसान रामनिवास गौड़ ने बताया कि वो चार साल से साढ़े छह बीघा में जैविक खेती कर रहे हैं। लेकिन इस बार पानी की कमी होने से चार बीघा में ही चना,मसूर की फसल ले पाए हैं। गौड़ खेत में किसी भी प्रकार के रसायनयुक्त दवाई का प्रयोग नहीं करते हैं। 100 फीसदी जहरमुक्त खेती करते हैं। इसका फायद भी उन्हे नजर आ रहा है। किसान का कहना है कि किसान शुरुआत में दलहनी फसलों से जैविक खेती करने की शुरुआत करें ताकि पर्याप्त नाईट्रोजन मिल सके उसके बाद अन्य फसलों की शुरुआत करें। ताकि एकदम से उत्पादन कम नहीं हो। गौड़ ने कहा कि आजकल कई कंपनियां जैविक के नाम पर किसानों को जैविक खाद दे रही है, लेकिन वास्तव में जैविक तो हम स्वयं बनाते वो ही होता है। हमें जैविक खेती की ओर ही लौटना पड़ेगा नहीं तो कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता जाएगा।
जैविक खेती के ये है प्रमुख फायदे-
-शुद्ध अनाज व सब्जियों को पकाने में कम समय लगता है
– कैंसर, हार्टअटैक जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है
– लगातार बंजर हो रही कृषि भूमि को बचाया जा सकता है
-जैविक खेती से फसल मित्र किटों को बचाया जा सकता है जो खेतों में कई तरह के फायदे करते हैं – जैविक खेती से चर्मरोग व कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है
जैविक खेती: महिलाएं भी जुटी हुई है पंरपरागत खेती में
4 बीघा में कर रही ममता खेती:
जिले के हरनावदा गजा में संगीता स्वयं जैविक खाद बनाती है। विधवा संगीता बाई चार साल से पूरी तरह से चार बीघा मेंजैविक खेती कर रही है। खरीफ में गेहूं, चना व धनिया पूरी तरह से जैविक करती है।
प्रशिक्षण लिया फिर जुट गई- जिले के सुवांस गांव निवासी ममता दांगी ने पंजाब नेशनल बैंक के आरसेटी से चार साल पहले जैविक खेती का प्रशिक्षण लिया। उसके बाद से लगातार चार साल से जैविक खेती कर रही है। ममता अभी प्याज, गेंहू, धनिया पूरी तरह से जैविक कर रही है।
अफीम भी कर रही जैविक-
जिले के कलोतियां निवासी महिला किसान ममता नागर ने चार साल पहले देवीलाल गुर्जर से आरसेटी में जैविक खेती का प्रशिक्षण लिया था। उसके बाद से ही नियमित जैविक खेती कर रही है।नागर स्वयं वर्मी कंपोस्ट बनाती है। नागर के अफीम के खेत व संतरे बगीचे में भी वर्मी कंपोस्ट ही काम में लेती है। नागर 6 बीघा में पूरी तरह जैविक खेती कर रही है। नागर का संतरा का बगीचा पहले नहीं आता था, जब से जैविक खेती शुरु की तो बगीचा भी अच्छा आ रहा है।
फैक्ट फाइल: – जिले मेंं 4500 किसान कर चुके है जैविक खेती का निरीक्षण
– जिले में कोटा, देवास, सीकर, उज्जैन सहित कई जगह किसान जैविक खेती का निरीक्षण कर चुके है -करीब 250 जिले के बाहर के किसानों ने जैविक खेती का प्रशिक्षण भी लिया है।
१६ महिला समूह भी जुड़े जैविक खेती से
7755 महिला किसानों ने जैविक खेती के लिए कराया पंजीयन
1200 हैक्टेयर में अभी हो रही है जैविक खेती
9 किसान तो सिर्फ जैविक खेती ही कर रहे
जिले में 1200 हैक्टेयर भूमि पर जैविक खेती हो रही है। वहीं 9 एकल किसान है जिन्होने प्रमाणीकरण करवाकर जैविक खेती को अपनाया है। एक जैविक प्रोसेङ्क्षसग यूनिट भी अकलेरा के पास जिले में लगी हुई है।
आरएस वैष्णव,
उप बीज प्रमाणीकरण अधिकारी, राजस्थान राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण संस्था, झालावाड़।
जैविक खेती में झंडे गाड़ रहा झालावाड़ | Jhalawar is raising its flag in organic farming – New Update
Credit : Rajasthan Patrika