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राजस्थान में जर्जर हो चुके 2699 भवनों को सील कर ध्वस्त करने के आदेश दिए गए हैं। शिक्षा मंत्री भी बोल चुके कि जो कमरा आपको जर्जर लगता है, उसे ताला लगा दें।

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उसमें बच्चों को नहीं बैठाए। वहीं, जयपुर में जवाहर नगर स्थित दो स्कूलों में जर्जर हालत के बावजूद बच्चे पढ़ रहे हैं। एक स्कूल में तीन क्लास हैं, लेकिन एक में ही बच्चे पढ़ सकते हैं। एक ब्लैक बोर्ड पर लिखा था कि इस कमरे में न बैठें टीन शेड टूटी हुई हैं। आगे पढ़िए दोनों स्कूल से रिपोर्ट…

टीला नम्बर 4 स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल के दो कमरों में एक में आंगनबाड़ी और ऑफिस का काम होता है।

टीला नम्बर 4 स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल के दो कमरों में एक में आंगनबाड़ी और ऑफिस का काम होता है।

तस्वीर 1

राजकीय प्राथमिक स्कूल

लोकेशन- टीला नम्बर 4, जवाहर नगर कच्ची बस्ती

वन विभाग की जमीन के पास जवाहर नगर कच्ची बस्ती में बने राजकीय प्राथमिक स्कूल की हालत जर्जर हो चुकी है। यहां सिर्फ तीन कमरों में स्कूल चलता है। इनमें से एक कमरा आंगनबाड़ी के पास है। दूसरा कमरा ऑफिस कार्य के काम आता है। एक ही कमरें में क्लास एक से पांचवी तक के करीब 70 बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है।

स्कूल के कमरों में सीलन से बदबू आती रहती है। यहां एक ब्लैक बोर्ड पर लिखा था कि इस कमरे में न बैठें टीन शेड टूटी हुई हैं। वहीं, दूसरे कमरे में बोर्ड पर लिखा था। नोट – इस कमरे में ही सभी बच्चे बैठे। स्कूल में एक क्लास के पीछे शौचालय थे। स्टूडेंट्स ने बताया- शौचालय करीब दस साल पहले ही टूट गए थे। इनकी अधिकारियों ने कभी सुध नहीं ली।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय टीला नम्बर 4 जवाहर नगर कच्ची बस्ती में टूटा शौचालय जहां पौधे उग आए है।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय टीला नम्बर 4 जवाहर नगर कच्ची बस्ती में टूटा शौचालय जहां पौधे उग आए है।

स्टूडेंट्स बोले- स्कूल की छत टूटी हुई, पानी टपकता, करंट आता

प्राचार्य ने निजी खर्चे पर एक टॉयलेट बनाया था। इस पर ताला लगा हुआ था। वहीं, पास ही वन विभाग की दीवार पर दरारें हैं। चौथी में पढ़ने वाले छात्र अमन ने बताया- स्कूल की छत टूटी हुई है। पानी टपकता है। हमारे यहां शौचालय भी टूटे हुए हैं।

पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र नमन ने बताया- हमारे स्कूल की हालत बहुत खराब है। बारिश के दिन में स्कूल में करंट का डर रहता है। स्कूल की छत टूटी हुई है, पानी टपकता है। हम 70 बच्चों को एक कमरे में बैठाकर ही पढ़ाया जाता है।

पांचवी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा दिवानी बैरवा ने बताया- स्कूल की छत टूटी हुई है। यहां छत से पानी आता है। शौचालय टूटा हुआ है, जिसके कारण हम खुले में शौच करने को मजबूर हैं। पीने के पानी की टंकी अपनी दुर्दशा की कहानी खुद बयां कर रही थी। इन सबके बाद हमने स्कूल में प्राचार्य विरेंद्र शर्मा से बात करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया। इससे समझा जा सकता है कि शिक्षकों में प्रशासनिक कार्रवाई का कितना डर रहता होगा।

राजकीय बालिका प्राथमिक विद्यालय आवसन मंडल टीला नम्बर 6बी जवाहर नगर

राजकीय बालिका प्राथमिक विद्यालय आवसन मंडल टीला नम्बर 6बी जवाहर नगर

तस्वीर- 2

राजकीय बालिका प्राथमिक स्कूल

लोकेशन- आवासन मंडल टीला नम्बर 6बी, जवाहर नगर

जवाहर नगर के आवासन मंडल के पास स्थित राजकीय बालिका प्राथमिक स्कूल पहुंचने के लिए गंदे पानी के बीच होकर निकलना पड़ता है। यहां स्कूल के खुले मैदान में कचरे के ढेर लगा है। इसकी बदबू स्टूडेंट और टीचर परेशान रहते हैं।

स्कूल के एंट्री गेट पर दाएं तरफ पुरानी झोपड़ीनुमा लोहे का आकार बना है। इस पर किसी तरह की कोई छत नहीं है। वहीं, एंट्री गेट के सामने एक मंजिला कमरे बने हैं।

सभी दीवारों पर सीलन आई हुई थी। यहां ऊपर वाले कमरे में बच्चों को पढ़ाया जाता है। नीचे वाले कमरे में सीलन के साथ छत में दरारें हैं। स्कूल की जिस टंकी से बच्चे पानी पीते हैं। इसमें काई जमी हुई है।

टीला नम्बर 6बी के पास स्थित राजकीय बालिका प्राथमिक स्कूल के पास कचरे के ढेर लगा हुआ है।

टीला नम्बर 6बी के पास स्थित राजकीय बालिका प्राथमिक स्कूल के पास कचरे के ढेर लगा हुआ है।

कचरे के ढेर होने से हमें बीमारियों का भय

एक टीचर ने बताया- इस स्कूल में ग्राउंड फ्लोर पर बारिश से दौरान पानी भर जाता है। पास ही कचरे के ढेर होने से हमें बीमारियों का भय रहता है। छात्र सागर ने बताया- बारिश के दिनों में स्कूल में पानी भर जाता है। आस पड़ोस का पानी यहां आता है। इससे हम पढ़ नहीं पाते।

कक्षा पांच में पढ़ने वाले राज ने बताया- हमारे स्कूल में दरारें हो रही हैं। दीवारों पर सीलन है। बाहर का पानी स्कूल में भर जाता है। बाहर कचरे की वजह से हम खेल नहीं पाते। गंदगी के कारण मच्छर हो रहे हो जो हमें काटते हैं।

जवाहर नगर कच्ची बस्ती विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष युगल खोड़ा ने बताया- जवाहर नगर कच्ची बस्ती में करीब 7 स्कूल हैं। इनमें से 6 स्कूलों में छत टपकती है। कई स्कूल तो लकड़ियों की बनी हुई है।

पानी के कनेक्शन टूटे हुए है। पीने के पानी की टंकियों में कीड़े पड़े हुए हैं। शौचालय टूटे हुए हैं। बच्चे खुले में शौच करने को मजबूर हैं। स्थानीय बच्चे बारिश होने पर स्कूल से घर जाने को मजबूर हो जाते हैं।

झालावाड़ हादसे के बाद बच्चे के माता-पिता और परिवार डरे सहमे है। कुछ स्कूल तो कचरों के ढेर पर ही संचालित किए जा रहे है।



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