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जयपुर में हजरत इमाम हुसैन का चालीसवां (अरबईन) मनाया गया

जयपुर में हजरत इमाम हुसैन का चालीसवां (अरबईन) मनाया गया। शिया वक्फ़ ईमाम बारगाह हकीम मोमिन अली पन्नीगरान में मजलिस का आयोजन किया गया। मौलाना सैयद सज्जाद हुसैन रजवी ने मजलिस को संबोधित किया।

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जुलूस में इमाम हुसैन के घोड़े की शबीह और अलम के साथ श्रद्धालु सुभाष चौक पहुंचे। वहां तकरीर के बाद जंजीरी मातम हुआ। हजारों अकीदतमंदों ने लब्बैक या हुसैन के नारे लगाए। जयपुर की अंजुमनों ने नोहा पढ़ा। जुलूस में शामिल लोगों के लिए जगह-जगह सबील लगाई गई।

बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग या हुसैन के नारे लगाते हुए दहकते अंगारों पर चले।

बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग या हुसैन के नारे लगाते हुए दहकते अंगारों पर चले।

इससे पहले गुरुवार को चालीसवें की पूर्व संध्या पर शिया वक्फ़ इमाम बारगाह नवाब हमदानियां बॉस बदनपुरा में मजलिस हुई। इसके बाद बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग या हुसैन के नारे लगाते हुए दहकते अंगारों पर चले।

चालीसवें की पूर्व संध्या पर शिया वक्फ़ इमाम बारगाह नवाब हमदानियां बॉस बदनपुरा में मजलिस हुई।

चालीसवें की पूर्व संध्या पर शिया वक्फ़ इमाम बारगाह नवाब हमदानियां बॉस बदनपुरा में मजलिस हुई।

शिया समाज के मीडिया प्रभारी सैयद जाफ़र अब्बास तक़वी ने बताया कि जुलूस शाम 6 बजे कर्बला पहुंचा। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत का उद्देश्य मानवता की रक्षा था। यह जुलूस शांति, सद्भावना और आपसी सौहार्द का प्रतीक है। जुलूस के दौरान सफाई का विशेष ध्यान रखा गया।



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