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पिता राजेंद्र लोढ़ा की गिरफ्तारी के बाद देर रात को सीसीटीवी फुटेज में साहिल लोढ़ा, अपने चाचा दीपक लोढ़ा को तीन ट्रॉली बैग देते हुए नजर आया था।

रियल एस्टेट कंपनी लोढ़ा डेवलपर्स के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र लोढ़ा जेल की सलाखों के पीछे है। वे लोढ़ा ग्रुप की कंपनी लोढ़ा डेवलपर्स में कंपनी के पूर्व डायरेक्टर थे। उन्होंने कंपनी में रहते हुए 85 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी। कहा जाता है कि, कंपनी की जांच

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दरअसल, मुंबई क्राइम ब्रांच (EOW) ने पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र लोढ़ा को 85 करोड़ रुपए के आरोप में 17 सितंबर को मुंबई के वर्ली स्थित घर से गिरफ्तार किया था। 13 दिन की पुलिस रिमांड के बाद कोर्ट ने उन्हें सोमवार को जेल भेज दिया गया। इससे पहले कंपनी की इंटरनल जांच के दौरान उसका बेबाक और बेधड़क रैवेया रहा था।

कंपनी जांच के दौरान ‘सुसाइड बॉम्बर’ की दी धमकी मुंबई पुलिस की एफआईआर के अनुसार – रियल एस्टेट कंपनी ने इंटरनल जांच के दौरान राजेंद्र लोढ़ा को उनकी कथित रूप से ज्ञात आय से ज्यादा अर्जित संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए कहा था। ये जानकारी देने से मना करने और इस्तीफे की पेशकश के बाद राजेंद्र लोढ़ा की ओर से भरत नरोत्तमदास नरसाना ने कंपनी के एमडी अभिषेक लोढ़ा से मुलाकात की थी।

मुलाकात के दौरान, नरसाना ने अभिषेक लोढ़ा को धमकी देते हुए कहा कि “राजेंद्र लोढ़ा एक सुसाइड बॉम्बर हैं, वह अपना तथा कंपनी का नुकसान कर सकते हैं और उसके लिए वह कोई भी हद पार कर सकते हैं,” साथ ही “कंपनी की बदनामी कर सकते हैं”। इतना ही नहीं, इस्तीफा देने के बाद राजेंद्र लोढ़ा ने कथित तौर पर धमकी दी कि अगर कंपनी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की, तो वह कंपनी के संचालकों का अहित करके उन्हें जीवित नहीं छोड़ेंगे।

400 करोड़ रुपए की संपत्ति का राज लोढ़ा डेवलपर्स की रिपोर्ट के अनुसार- राजेंद्र लोढ़ा ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में अपनी कुल संपत्ति रु.130 करोड़ बताई थी। हालांकि कंपनी की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि राजेंद्र लोढ़ा और उनके परिवार की कुल संपत्ति 400 रुपए करोड़ से ज्यादा है। कंपनी का आरोप है कि यह इतनी ज्यादा संपत्ति नकद लेन-देन और भ्रष्टाचार करके अर्जित की गई है।

इस तरह किया कंपनी में फ्रॉड दर फ्रॉड

1. “फर्जी कब्जा” दिखाकर 3.03 करोड़ रुपए नुकसान राजेंद्र लोढ़ा और उनके बेटे साहिल लोढ़ा पर आरोप है कि उन्होंने एक स्थानीय ब्रोकर के साथ मिलकर निलेश चंद्रभान अग्रवाल नामक व्यक्ति से नकद राशि लेने के लिए कंपनी को धोखा दिया। उन्होंने कंपनी को यह झूठा विश्वास दिलाया कि अग्रवाल का पनवेल के नितलस गांव में 10 एकड़ जमीन पर कब्जा है, जबकि वास्तव में वहां उनका कोई कब्जा या मालिकाना हक नहीं था। इस “कब्जे” को छुड़ाने के झूठे समझौते के आधार पर, उन्होंने अग्रवाल को रु.3.03 करोड़ का भुगतान अधिकृत कराया और इस राशि को खुद ने नकद में ले लिया।

2. बेटे की कंपनी को औने-पौने दाम पर जमीन बेचकर .6.25 करोड़ रुपए का घाटा राजेंद्र लोढ़ा ने कथित तौर पर अपने बेटे साहिल लोढ़ा की पार्टनरशिप फर्म एन.बी.पी. एजुटेक इन्फ्राटेक एलएलपी को पनवेल के भोपर गांव की 3,630 वर्ग मीटर जमीन बाजार भाव से काफी कम कीमत पर बेच दी। यह जमीन रु.7,575.75 प्रति वर्ग मीटर की दर से रु.2.75 करोड़ में बेची गई, जबकि 2022 में सरकारी दर (IGR) के अनुसार इसकी कीमत रु.25,000/- प्रति वर्ग मीटर यानी लगभग रु.9 करोड़ थी। कंपनी का आरोप है कि इस लेनदेन से उसे रु.6.25 करोड़ का नुकसान हुआ।

3. सरकारी मुआवजे की गुप्त जानकारी का दुरुपयोग, 10 करोड़ का नुकसान राजेंद्र लोढ़ा पर नाहरेन गांव, अंबरनाथ की 1.46 एकड़ जमीन को मात्र रु.88 लाख में बेचने का आरोप है। यह जमीन उस समय बेची गई, जब राजेंद्र लोढ़ा को पहले से जानकारी थी कि विरार-अलिबाग मल्टी मॉडल कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए सरकार इसका अधिग्रहण करने वाली है। इस जमीन के लिए 10 महीने बाद ही सरकार ने रु.10.88 करोड़ का मुआवजा दिया, जिससे कंपनी को लगभग रु.10 करोड़ का नुकसान हुआ।

4. ‘बेनामी कंपनी’ को जमीन बेच रु.10 करोड़ का नुकसान कंपनी का दावा है कि राजेंद्र लोढ़ा और साहिल लोढ़ा ने शिरडोण गांव की 4,150 वर्ग मीटर जमीन एक कथित ‘बेनामी कंपनी’ उषा प्रॉपर्टीज को मात्र रु.48 लाख में बेच दी, जबकि यह जमीन उषा प्रॉपर्टीज के प्रोजेक्ट के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण थी और इससे अच्छा मुआवजा अपेक्षित था। कंपनी का आरोप है कि उषा प्रॉपर्टीज, जिसमें भरत नरसाना, नितिन वडोर और रितेश नरसाना मालिक हैं, वास्तव में राजेंद्र लोढ़ा और साहिल लोढ़ा की ही बेनामी कंपनी है। इस लेनदेन से कंपनी को करीब रु.10 करोड़ का नुकसान हुआ है।

5. टी.डी.आर. की कम दर पर बेचने से रु.20 करोड़ का घाटा राजेंद्र लोढ़ा ने कथित तौर पर कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका द्वारा दिए गए 7,15,000 वर्ग फुट टी.डी.आर. (Transfereable Growth Rights) को बिना अनुमति के 35 ट्रांजेक्शन्स में बाजार भाव से कम, यानी रु.685/- प्रति वर्ग फुट की दर से बेच दिया। इससे कंपनी को तकरीबन रु.20 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ।



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