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डूंगरी बांध संघर्ष समिति की ओर से रविवार को बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
डूंगरी बांध परियोजना को लेकर सवाई माधोपुर के प्रभावित गांवों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जनभावनाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए परियोजना को जबरन आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी मुद्दे पर रविवार क
76 गांव के सक्रिय कार्यकर्ता होंगे शामिल
बैठक में 76 गांवों से जुड़े समिति सदस्य, आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में युवा भाग लेंगे।
बताया जा रहा है कि बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल आंदोलन के प्रथम चरण में विरोध सभाएं और ज्ञापन सौंपने का दौर जारी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी भावनाओं की अनदेखी जारी रखी तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।
संघर्ष समिति से जुड़े अमर सिंह मीणा और सरपंच प्रतिनिधि वीरेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि गांवों में जाकर लोगों से चर्चा की गई है। ग्रामीणों की स्पष्ट राय है कि सरकार की मनमानी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। ऐसे में संघर्ष समिति अब बड़े निर्णय लेने के मूड में है।
कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा बोले, ग्रामीणों को समझाएंगे
जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह के कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री डूंगरी बांध के विरोध प्रदर्शन को लेकर बोले थे। यहां कृषि मंत्री ने कहा कि ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कुछ लोगों की ओर से यह अफवाह फैलाई जा रही है की डूंगरी बांध के निर्माण के दौरान क्षेत्र के 76 गांवों को हटाया जाएगा। जबकि करौली सवाई माधोपुर करौली जिले के केवल 11 गांव विस्थापित किए जाएंगे। यहां से केवल सपोटरा के चार गांव, सवाई माधोपुर के तीन और खंडार के चार गांव स्थापित होंगे। जिन्हें सरकार मनचाहा मुआवजा देगी। इसी के साथ ही अच्छी मूलभूत सुविधाओं के साथ गांव को बसाया जाएगा। वह ग्रामीणों को इसके लिए गांव गांव जाकर समझाएंगे।
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